Govinda: बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता Govinda एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई नई फिल्म या डांस नंबर नहीं, बल्कि उनका वह बयान है जिसने इंडस्ट्री में समय की पाबंदी (Punctuality) को लेकर पुरानी बहस को फिर से जगा दिया है।
हाल ही में एक शो में उन्होंने खुलकर कहा —किसके बाप के अंदर ताकत है…” — गोविंदा का तीखा जवाब, बॉलीवुड में समय की पाबंदी पर छिड़ी बहस
“किसके बाप के अंदर ताकत है कि वो पाँच शिफ्ट करके समय पर आए… हो ही नहीं सकता।”
Govinda का बयान: ‘Defame’ करने वालों को दिया करारा जवाब
Govinda ने यह बयान Two Much with Kajol and Twinkle शो में दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें सेट पर देर से पहुंचने को लेकर सालों तक बदनाम (defamed) किया गया, जबकि हकीकत कुछ और थी।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि
“मुझे बदनाम किया गया कि मैं समय पर नहीं आता। लेकिन कोई ये क्यों नहीं देखता कि एक समय में मैं 5-5 फिल्मों की शूटिंग कर रहा था। हर जगह समय पर पहुँचना संभव ही नहीं था।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वो केवल तभी सेट पर पहुंचते थे जब उनका “sur-taal” (तैयारी और मनोस्थिति) पूरी होती थी। उनका मानना है कि कलाकार का मूड और ऊर्जा उसके काम पर सीधा असर डालते हैं।

सेट पर देर से पहुंचने का आरोप नया नहीं
Govinda पर सेट पर देर से आने का आरोप कोई नई बात नहीं है। 90 और 2000 के दशक में भी फिल्म इंडस्ट्री में यह चर्चा आम थी कि वे कई बार घंटों की देरी से सेट पर पहुंचते थे।
- अभिनेत्री रवीना टंडन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि Govinda कभी-कभी 5 घंटे तक लेट होते थे।
- शक्ति कपूर ने मिड-डे को बताया था कि एक समय ऐसा भी था जब गोविंदा 12 घंटे देर से सेट पर आते थे, लेकिन अब वे समय से पहले पहुंचने लगे हैं।
- कई निर्माताओं ने भी स्वीकार किया कि इतने ज़्यादा प्रोजेक्ट्स को एक साथ मैनेज करना किसी भी अभिनेता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
एक साथ कई फिल्मों की शूटिंग — देरी की बड़ी वजह
Govinda का करियर उस दौर में चला जब फिल्में ओपन शेड्यूल में शूट होती थीं। उन्होंने कभी एक समय में 5-6 फिल्में साइन की होती थीं।
- सुबह एक फिल्म की शूटिंग,
- दोपहर दूसरी फिल्म की डबिंग,
- शाम किसी और फिल्म का सॉन्ग शूट —
ऐसे में हर जगह समय पर पहुंचना व्यावहारिक रूप से मुश्किल था।
वे बताते हैं कि कई बार एक लोकेशन से दूसरी जगह पहुंचने में ही घंटों लग जाते थे। साथ ही, मेकअप, कॉस्ट्यूम, लाइटिंग, सेट तैयार न होना जैसी वजहों से भी शूटिंग शुरू होने में देरी होती थी।
‘Sur-Taal’ का कॉन्सेप्ट — एक कलाकार की तैयारी का हिस्सा
Govinda ने अपने बयान में एक दिलचस्प बात कही — उन्होंने कहा कि वे सेट पर तभी पहुंचते थे जब उनका “sur-taal” ठीक होता था।
इसका मतलब है कि वे केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी तैयार होना ज़रूरी मानते थे।
“मैं दिलीप कुमार साहब का अनुयायी था। अगर मन से तैयार नहीं हो तो कैमरे के सामने खड़ा होना बेईमानी है।”
यह बात दिखाती है कि गोविंदा अपने अभिनय को सिर्फ ‘काम’ नहीं बल्कि ‘कला’ मानते थे, जिसके लिए मानसिक तैयारी भी उतनी ही ज़रूरी थी।
90 के दशक में गोविंदा की डिमांड और Stardom
यह भी याद रखना चाहिए कि गोविंदा सिर्फ कोई आम अभिनेता नहीं थे। वे 90 के दशक में हिंदी सिनेमा के सबसे ज़्यादा व्यस्त सितारों में से एक थे।
- साल 1994-2000 के बीच उन्होंने 60+ फिल्मों में काम किया।
- कई बार एक ही हफ्ते में उनकी 2 फिल्में रिलीज़ होती थीं।
- निर्देशक उनके साथ काम करने के लिए लाइन में रहते थे, क्योंकि उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर गारंटी बन चुकी थीं।
ऐसे में शूटिंग शेड्यूल में गड़बड़ी और समय की पाबंदी पर सवाल उठना स्वाभाविक भी था।
समय की पाबंदी बनाम स्टार पॉवर — एक पुरानी बहस
गोविंदा का यह बयान इस पुरानी बहस को भी दोबारा सामने लाता है —
👉 “क्या स्टार पॉवर समय की पाबंदी से बड़ी होती है?”
कई निर्माता और निर्देशक मानते हैं कि जब कोई स्टार बॉक्स ऑफिस पर फिल्में हिट करा रहा हो, तो उसके समय को लेकर उद्योग थोड़ा लचीला रवैया अपना लेता है।
लेकिन जैसे-जैसे इंडस्ट्री पेशेवर होती गई, मल्टीप्लेक्स युग और डिजिटल वर्कफ़्लो आया — शूटिंग शेड्यूल में देरी को लेकर दृष्टिकोण बदल गया।
आज के दौर में, जहां एक मिनट की देरी का मतलब लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है, वहां समय की पाबंदी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
गोविंदा का बयान क्यों ज़रूरी है
Govinda का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने सिर्फ आरोपों का जवाब नहीं दिया, बल्कि उन्होंने एक ऐसा पक्ष सामने रखा जो शायद बहुत कम लोग समझते हैं —
👉 एक अभिनेता की मानसिक और शारीरिक तैयारी,
👉 इंडस्ट्री की पुरानी कार्य संस्कृति,
👉 और Stardom के समय से जुड़े दबाव।
यह बयान इस बात का भी संकेत है कि इंडस्ट्री में समय की पाबंदी को लेकर सिर्फ एकतरफा राय नहीं हो सकती — इसमें कई परतें होती हैं।
बयान से ज्यादा है इसके पीछे की कहानी
Govinda का “किसके बाप के अंदर ताकत है…” कहना भले ही सोशल मीडिया पर मीम्स का विषय बन गया हो, लेकिन इसके पीछे एक गहरी सच्चाई छिपी है।
वे उस दौर के स्टार थे जब बॉलीवुड की कार्यप्रणाली आज से बिल्कुल अलग थी।
👉 उन्होंने अपने स्टाइल में जवाब दिया, लेकिन उस जवाब ने समय की पाबंदी, पेशेवर रवैये और स्टार कल्चर पर एक ज़रूरी चर्चा शुरू कर दी है।
आज के समय में जहाँ इंडस्ट्री पूरी तरह प्रोफेशनल हो चुकी है, गोविंदा का बयान हमें उस दौर में झाँकने का मौका देता है जब स्टारडम वाकई अपने चरम पर था।
गोविंदा के इस बयान के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए Times of India की रिपोर्ट देखें।