E20 Petrol Policy: भारत की ऊर्जा नीतियों में हाल ही में एक बड़ा मोड़ आया जब Supreme Court ने E20 Petrol Policy को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि देशभर में उपभोक्ताओं को पारंपरिक एथेनॉल-फ्री पेट्रोल (E0) का विकल्प भी दिया जाए, क्योंकि सभी गाड़ियाँ E20 के अनुकूल नहीं हैं। लेकिन अदालत ने सरकार की दलीलें मानते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब एथेनॉल-फ्री पेट्रोल उपलब्ध कराना जरूरी नहीं है। यह फैसला लाखों वाहन मालिकों, खासकर पुरानी गाड़ियों के लिए बेहद अहम साबित होगा।
E20 Petrol Policy
मामला क्या था?
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि:
- सरकार की नीति एक संगठित और सुविचारित कदम है, जिसे रोकना या बदलना अदालत का काम नहीं है।
- विकल्प के तौर पर एथेनॉल-फ्री पेट्रोल उपलब्ध कराना अनिवार्य नहीं है।
- अदालत नीति निर्धारण में हस्तक्षेप नहीं करेगी, क्योंकि यह सार्वजनिक हित, ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के लाभ से जुड़ा मुद्दा है।
सरकार और उद्योग जगत की दलीलें
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सरकार की ओर से दलील रखते हुए कहा कि:
- भारत का तेल आयात बिल बहुत बड़ा है। एथेनॉल मिश्रण से यह बोझ कम होगा।
- एथेनॉल उत्पादन से गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- पर्यावरण की दृष्टि से यह कदम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने की दिशा में मददगार है।
वहीं, SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) ने बताया कि:
- नए मॉडल, खासकर अप्रैल 2023 के बाद बने वाहन, पहले से ही E20 कम्पैटिबल हैं।
- पुराने वाहनों में मामूली तौर पर (लगभग 2–4%) माइलेज घट सकता है, लेकिन सुरक्षा का कोई खतरा नहीं है।
उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब
- एथेनॉल-फ्री पेट्रोल अब नहीं मिलेगा: जो लोग सोच रहे थे कि वे E0 का विकल्प चुन सकते हैं, उनके लिए अब यह रास्ता बंद हो गया है।
- पुरानी गाड़ियों पर E20 Petrol Policy असर: 2023 से पहले बनी कारें और बाइकें थोड़ी कम माइलेज दे सकती हैं। हालांकि गंभीर नुकसान या हादसे का खतरा कम बताया जा रहा है।
- बीमा और वारंटी से जुड़ी चिंताएँ: बीमा कंपनियों के लिए यह एक ग्रे एरिया हो सकता है। इसलिए वाहन मालिकों को सलाह है कि वे अपनी पॉलिसी और गाड़ी की यूज़र मैनुअल को ध्यान से पढ़ें।
- कीमत और उपलब्धता: सरकार का मानना है कि लंबे समय में एथेनॉल का उपयोग पेट्रोल को और सस्ता कर सकता है, क्योंकि भारत कच्चे तेल पर कम निर्भर होगा।
आलोचनाएँ और चिंताएँ
फैसले के बाद कई वाहन मालिकों और उपभोक्ता संगठनों ने चिंता जताई है।उनका कहना है कि उपभोक्ता की पसंद का अधिकार छीना गया है।भारत जैसे विशाल देश में जहाँ लाखों पुरानी गाड़ियाँ अभी भी सड़क पर चल रही हैं, उनके मालिकों को मजबूरी में E20 का इस्तेमाल करना पड़ेगा।
बड़े स्तर पर फायदे
हालाँकि आलोचना अपनी जगह है, लेकिन सरकार की योजना के लाभ भी स्पष्ट हैं:
- हर साल अरबों डॉलर का तेल आयात बिल घटेगा।
- गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से एथेनॉल उत्पादन होने पर किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी।
- यह कदम भारत के 2030 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मदद करेगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि भारत अब पारंपरिक ईंधन पर निर्भर नहीं रह सकता। उपभोक्ताओं को भले ही शुरू में थोड़ी परेशानी उठानी पड़े, लेकिन दीर्घकाल में यह बदलाव पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
हाँ, सरकार को चाहिए कि वह उपभोक्ताओं की चिंताओं को दूर करने के लिए सार्वजनिक जागरूकता अभियान, स्पष्ट लेबलिंग, और पुराने वाहनों के लिए तकनीकी समाधान पर ध्यान दे। तभी यह नीति सभी के लिए संतुलित और सफल साबित होगी।
Supreme Court to hear plea challenging the E20 petrol policy of the Centre
— Bar and Bench (@barandbench) September 1, 2025
Plea urged petrol without ethanol should be an option for the consumer#Ethanol20 #SupremeCourtofIndia pic.twitter.com/gjed7cBm2J
उपरोक्त बेंचमार्क मीडिया और सोशल मीडिया स्रोतों से प्राप्त किए गए हैं।