भारत-पाक हैंडशेक विवाद पर ऑस्ट्रेलिया की चुटकी, वीडियो हटाने तक पहुंचा मामला

एशिया कप 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान टीम से पारंपरिक हैंडशेक (हाथ मिलाने) से इनकार करने के बाद, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ियों और मीडिया ने इस घटना पर व्यंग्य करते हुए एक प्रचार वीडियो जारी किया, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है। बाद में इस वीडियो को भारी विरोध के चलते हटा दिया गया।

यह मामला सिर्फ क्रिकेट के मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें खेल भावना, राष्ट्रीय गर्व और राजनीतिक संवेदनशीलता जैसे कई पहलू जुड़े हैं। आइए तरीके से समझते हैं कि यह पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ और फिर ऑस्ट्रेलिया तक कैसे पहुंचा।

भारत-पाक हैंडशेक विवाद

भारत ने पाकिस्तान टीम से हैंडशेक से किया इनकार

एशिया कप 2025 के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए मैच में भारतीय खिलाड़ियों ने पारंपरिक हैंडशेक की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।

  • टॉस से पहले, दोनों टीमों के कप्तानों के बीच भी सामान्य हैंडशेक नहीं हुआ।
  • मैच खत्म होने के बाद भी भारतीय टीम ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया और सीधे मैदान से बाहर चली गई।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टीम प्रबंधन ने इसे एक राजनीतिक या शत्रुतापूर्ण कदम नहीं बताया, बल्कि इसे पाहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में पेश किया। इस हमले में भारतीय सुरक्षाबलों के जवानों की शहादत हुई थी, और इसके तुरंत बाद भारत और पाकिस्तान के बीच मैच खेला गया था।

भारतीय अधिकारियों ने कहा कि इस समय “सामान्य मैत्रीपूर्ण इशारे” करना उचित नहीं था। हालांकि, पाकिस्तान क्रिकेट टीम और उसके कोच माइक हेसन ने इस व्यवहार को लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के बीच खेल भावना की परंपरा को राजनीति से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का वीडियो: व्यंग्य और मज़ाक

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आगामी सीरीज़ से पहले ऑस्ट्रेलिया के स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Kayo Sports ने एक प्रचार वीडियो जारी किया। इस वीडियो में पुरुष और महिला क्रिकेटर — जिनमें ग्लेन मैक्सवेल, मिचेल मार्श, जोश हेज़लवुड, एलिसा हीली और अन्य शामिल थे — भारत के “नो हैंडशेक” रवैये का मजाक उड़ाते दिखे।

वीडियो की शुरुआत में एंकर कहता है:

“हम जानते हैं कि भारत ऑस्ट्रेलिया आ रहा है। लेकिन हमने उनकी एक बड़ी कमजोरी पहचान ली है।”

इसके बाद दूसरा एंकर कहता है:

“हम जानते हैं कि उन्हें पारंपरिक ग्रीटिंग (हैंडशेक) ज्यादा पसंद नहीं है, तो क्यों न उन्हें इसी से शुरू में ही चौंका दिया जाए।”

इसके बाद वीडियो में खिलाड़ियों को कई वैकल्पिक अभिवादन तरीकों का सुझाव देते हुए दिखाया गया:

  • कुछ खिलाड़ी मुट्ठी मिलाने (fist bump) का सुझाव देते हैं,
  • कुछ मज़ाकिया और अजीब तरह के इशारे दिखाते हैं,
  • ट्रैविस हेड ने तो “आइस कप में उंगली डालने” की घटना को मज़ाक में दोहराया।

पूरा वीडियो हल्के-फुल्के अंदाज़ में बनाया गया था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके राजनीतिक और सांस्कृतिक असर को लेकर बहस छिड़ गई।

वीडियो हटाया गया, लेकिन बहस जारी

जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर फैला, भारतीय प्रशंसकों और कुछ अंतरराष्ट्रीय खेल पत्रकारों ने इसकी आलोचना शुरू कर दी। उनका कहना था कि यह मज़ाक की सीमा पार कर गया है और एक ऐसे कदम पर तंज कसा गया है जो राष्ट्रीय शोक और संवेदनशीलता से जुड़ा था।

विवाद बढ़ने के बाद Kayo Sports ने वीडियो को अपने सभी प्लेटफॉर्म से हटा दिया। कंपनी ने एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए कहा:

“हमारा उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। वीडियो केवल हल्के-फुल्के अंदाज़ में बनाया गया था। अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो हम खेद व्यक्त करते हैं।”

हालांकि, वीडियो हटाए जाने के बाद भी इस मुद्दे पर चर्चाएं जारी हैं।

भारत में प्रतिक्रिया

भारत में सोशल मीडिया पर #HandshakeControversy और #RespectTheMoment जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई क्रिकेट प्रेमियों ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के रवैये को “असंवेदनशील” बताया। कुछ लोगों ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को किसी अन्य देश के आंतरिक या भावनात्मक मुद्दों पर व्यंग्य करने से बचना चाहिए।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई, लेकिन बोर्ड के सूत्रों ने मीडिया को बताया कि “टीम इस मामले को बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहती और पूरा ध्यान आगामी सीरीज़ पर है।”

ऑस्ट्रेलिया में प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलिया में भी इस वीडियो पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने इसे “पारंपरिक ऑस्ट्रेलियाई ह्यूमर” बताया और कहा कि भारतीय प्रतिक्रिया “थोड़ी ज़्यादा भावनात्मक” है।

हालांकि, कुछ ऑस्ट्रेलियाई पत्रकारों और विश्लेषकों ने यह भी स्वीकार किया कि टीम और मीडिया को राजनीतिक और शोक के मुद्दों पर व्यंग्य करने में सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने माना कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में परंपराएं और भावनाएं अलग-अलग देशों में अलग मायने रखती हैं।

खेल और राजनीति का संगम

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि खेल और राजनीति को पूरी तरह अलग रखना हमेशा संभव नहीं होता

  • भारत का हैंडशेक न करना एक राजनीतिक और भावनात्मक संदेश था।
  • पाकिस्तान ने इसे खेल भावना के नजरिये से देखा और निराशा जताई।
  • ऑस्ट्रेलिया ने इसे प्रचार और मज़ाक का विषय बना दिया, जिससे विवाद बढ़ गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को ऐसे मामलों में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए, ताकि भविष्य में टीमों और मीडिया को पता हो कि किन सीमाओं में रहकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

आगामी भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ पर असर?

हालांकि दोनों क्रिकेट बोर्डों ने इस विवाद को बढ़ाने से परहेज़ किया है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे आगामी भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट और वनडे सीरीज़ के माहौल पर कुछ हद तक असर पड़ सकता है।

ऑस्ट्रेलिया में आमतौर पर मैदान पर “माइंड गेम्स” का इस्तेमाल किया जाता है, और यह वीडियो भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था। लेकिन अब टीम को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी ताकि मैदान के बाहर कोई अनावश्यक विवाद न खड़ा हो।

भारतीय टीम द्वारा पाकिस्तान से हैंडशेक से इनकार एक भावनात्मक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील कदम था, जिसे खेल भावना के कुछ मानकों के अनुसार देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों द्वारा इस पर मज़ाक करना प्रचार का हिस्सा था, लेकिन यह एक संवेदनशील मुद्दे को छू गया।

  • वीडियो हटाए जाने से विवाद थोड़ा शांत हुआ है,
  • लेकिन इससे एक बार फिर यह सवाल उठा है कि क्या खेल को पूरी तरह राजनीति और राष्ट्रीय भावनाओं से अलग रखा जा सकता है?
  • साथ ही, मीडिया और खिलाड़ियों की जिम्मेदारी पर भी नई बहस शुरू हो गई है।

Leave a Comment